Badrinath Dham:सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने किए बदरीविशाल के दर्शन, सूर्य देवभूमि चैंलेज का भी किया शुभारंभ – Chief Of Defence Staff Cds General Anil Chauhan Arrives At Badrinath Dham Chamoli News
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान बदरीनाथ धाम दर्शन के लिए पहुंचे। उनके आगमन पर हेलीपैड पर पुलिस उपाधीक्षक चमोली मदन सिंह बिष्ट एवं थानाध्यक्ष नवनीत भंडारी ने उनका भव्य स्वागत किया गया।
धाम पहुंचते ही सीडीएस जनरल चौहान ने मंदिर परिसर का भ्रमण कर आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर अधिकारियों से विस्तार से जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों द्वारा उन्हें यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए किए जा रहे व्यापक इंतजामों से अवगत कराया गया।
सेना की सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0 प्रतियोगिता का शुभारंभ
गढ़वाल के हिमालयी क्षेत्र में भारतीय सेना की ओर से सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0 प्रतियोगिता का आयोजन 16 से 20 अप्रैल तक किया जाएगा, जिसका सीडीएस जनरल अनिल चौहान आज विधिवत शुभारंभ किया। 113 किमी लंबी इस यात्रा में तीन केदार शामिल हैं। इस आयोजन का उद्देश्य साहसिक खेलों के माध्यम से विरासत संरक्षण, पर्यटन और विकास को बढ़ावा देना है। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत यह आयोजन सीमांत गांवों में रोजगार और पर्यटन को प्रोत्साहित करेगा। इस यात्रा में कल्पेश्वर, रुद्रनाथ और तुंगनाथ शामिल हैं। प्रतियोगिता में 300 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इसमें 200 पुरुष-महिलाएं और 100 सेवा कर्मी शामिल हैं। विभिन्न आयु वर्ग के लिए 14 लाख रुपये की पुरस्कार राशि रखी गई है। प्रतियोगिता तीन चरणों में होगी। प्रथम दिवस हेलंग से कलगोठ 36 किमी की दूरी, दूसरे दिन कलगोठ से मंडल 39 किमी और तीसरे दिन मंडल से ऊखीमठ 38 किमी की दूरी तय की जाएगी।
हर्षिल दौरे पर पहुंचे
इसके बाद रक्षा प्रमुख अनिल चौहान हर्षिल दौरे पर पहुंचे। वहां पर उन्होंने वाईब्रैंट योजना के तहत सेना की ओर से बनाए गए हर्षिल सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र का शिलान्यास किया। इस दौरान चौहान ने स्थानीय ग्रामीणों और पूर्व सैनिको से मुलाक़ात की। सीडीएस अनिल चौहान बहुत ही सादगी के साथ ग्रामीणों से मिले।
उन्होंने कहा की सीमांत गांव के लोग और सेना एक दूसरे के पूरक होते हैं। बॉर्डर पर स्थानीय लोग सेना की मदद करते हैं, इसलिए सेना का भी कर्तव्य है कि वह सीमांत गांव के विकास में अपना सहयोग करें। कहा कि हर्षिल सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र से लोगों को रोजगार के साथ ही देश दुनिया के लोग हर्षिल घाटी के इतिहास, पर्यटक स्थलों और प्रकृति और जीवनशैली के बारे में जान पाएंगे।