काम की बात: उत्तराखंड का मंडुवा और झंगोरा घटाएगा मोटापा, मिलेट्स की पौष्टिकता पर शोध में जुटे वैज्ञानिक – Uttarakhand Mandua And Jhangora May Help Fight Obesity Icmr-nin Conducts Research On Millets Read All
उत्तराखंड के परंपरागत मोटे अनाज मंडुवा और झंगोरा के पोषक तत्वों पर आईसीएमआर का राष्ट्रीय पोषण संस्थान शोध कर रहा है। इससे देश में बढ़ रहे मोटापे को काबू करने की राह आसान हो जाएगी। राष्ट्रीय पोषण संस्थान की निदेशक डॉ.भारती कुलकर्णी का कहना है कि अगर महिला के गर्भधारण से पूर्व ही पोषण पर ध्यान दिया जाए तो बच्चा स्वस्थ होगा।
बुधवार को उत्तराखंड के पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल के नेतृत्व में आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान पहुंचा। यहां संस्थान की निदेशक डॉ.भारती कुलकर्णी दल से रूबरू हुईं। उन्होंने कहा कि पोषण का स्वस्थ जीवन में अहम स्थान है। उन्होंने कहा कि दो साल तक के बच्चे को शुगर नहीं देना चाहिए। कहा कि देश में मोटापा तेजी से चुनौती बनता जा रहा है।
संस्थान ने हाल ही में संपदा सर्वे किया है, जिसमें दो लाख से अधिक जगहों पर, 81 हजार घरों में उनकी टीम गई थी। उनके खानपान, जीवनशैली का अध्ययन किया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर संस्थान अपने सुझाव केंद्र को देगा। बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देश पर संस्थान के वैज्ञानिक उत्तराखंड के परंपरागत मिलेट्स मंडुवा, झंगोरा व चौलाई की पौष्टिकता पर शोध कर रहा है।
शहर की समृद्ध विरासत को समझने का अवसर
इन सभी मिलेट्स की न्यूट्रियंट वैल्यू पता चलेगी, जिससे भविष्य में मोटापे की चुनौती से निपटना आसान हो जाएगा। साथ ही रागी (फिंगर मिलेट) के सेवन से एनीमिया (खून की कमी) पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का आकलन करने के लिए नैदानिक व विश्लेषणात्मक अध्ययन किए जा रहे हैं।
दौरे के दौरान मीडिया दल ने संस्थान की लिपिड केमिस्ट्री व खाद्य विश्लेषण प्रयोगशालाओं का मुआयना किया और वैज्ञानिकों से संवाद किया। दौरे के सांस्कृतिक चरण में प्रतिनिधिमंडल ने सालारजंग संग्रहालय का भ्रमण किया। पत्रकारों ने यहां हैदराबाद के ऐतिहासिक वैभव, कला और दुर्लभ संग्रहों को करीब से जाना। कलाकृतियों और ऐतिहासिक वस्तुओं के जरिए शहर की समृद्ध विरासत को समझने का अवसर मिला।