उत्तराखंड:चंपावत के वनों में कालाबांसा का बढ़ता प्रकोप, जैव विविधता पर खतरा; शोध में खुलासा – The Increasing Menace Of Kalabansa In The Forests Of Champawat


तेजी से फैल रहा आक्रामक खरपतवार एजीरेटिना एडीनोफोरा (कालाबांसा) जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके वनस्पतियों की विविधता और प्राकृतिक पुनर्जनन क्षमता प्रभावित हो रही है। समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में यह वनों के पारंपरिक स्वरूप को भी बदल सकता है।

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के चंपावत परिसर के वनस्पति विज्ञान विभाग में कार्यरत डॉ. कविता खत्री के निर्देशन में एमएससी के विद्यार्थियों की ओर से किए गए शोध में इसका खुलासा हुआ है। शोध रशियन जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल इन्वेजन्स नामक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधार्थियों के मुताबिक, चंपावत जिले के कुछ हिस्सों में मिश्रित वनों पर एजीरेटिना एडीनोफोरा का आक्रमण लगातार बढ़ रहा है। इससे वन संरचना, वनस्पति संघटन और प्राकृतिक पुनर्जनन क्षमता में बदलाव हो रहा है। यहां तक कि देसी वनस्पति प्रजातियों का महत्व और प्रभुत्व घट रहा है। अध्ययन में बांज और देवदार समेत स्थानीय वनस्पतियों तथा जड़ी-बूटियों की विविधता पर भी बुरा प्रभाव देखने को मिला। इस आक्रामक पौधे का असर केवल जैव विविधता तक सीमित नहीं है। इससे मृदा स्थिरीकरण, कार्बन पृथक्करण और वन्यजीवों के पर्यावास जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं भी प्रभावित हो रही है। भविष्य के लिए यह चिंता का विषय है। शोधार्थियों के मुताबिक, आक्रामक पौधे के प्रसार को रोकने के लिए जन-जागरूकता, प्रभावी प्रबंधन और दीर्घकालिक निगरानी जरूरी है।

 

अध्ययन में 53 पादप प्रजातियां दर्ज, एगेरेटिना का प्रभाव प्रमुख


अध्ययन में आक्रमण प्रभावित और आक्रमण रहित क्षेत्रों में कुल 28 वनस्पति परिवारों की 53 पादप प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें जड़ी-बूटियों की प्रजातियां सबसे अधिक थीं। झाड़ियों और पेड़ों की प्रजातियां अपेक्षाकृत कम मिलीं। एस्टेरेसी, साइपरेसी और पोएसी वनस्पति परिवारों का प्रजाति विविधता में सबसे अधिक योगदान रहा। अध्ययन के दौरान कई आक्रामक प्रजातियां भी पाई गईं, जिनमें एगेरेटिना एडेनोफोरा का पारिस्थितिक प्रभाव प्रमुख रहा। वहीं, स्थानीय प्रजातियों में साइपेरस रोटंडस सबसे अधिक संख्या में दर्ज की गई। यह प्रजाति विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अधिक पाई गई, जहां आक्रामक पौधों का प्रभाव नहीं था।

बनलेख के मिश्रित वनों में किया गया अध्ययन


चंपावत जिले की बनलेख वन रेंज में एगेरेटिना एडेनोफोरा के प्रसार को लेकर अध्ययन किया गया। चंपावत बाजार से करीब 9.3 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से 1880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र मिश्रित शीतोष्ण बांज वनों के लिए जाना जाता है। यहां बांज, बुरांश और काफल समेत विभिन्न प्रजातियों के पेड़, झाड़ियां और जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं। अध्ययन के अनुसार, बनलेख वन रेंज कम ऊंचाई वाले उपोष्णकटिबंधीय चीड़ वनों और अधिक ऊंचाई वाले शीतोष्ण चौड़ी पत्ती वाले वनों के बीच संक्रमण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है। यह वन स्थानीय लोगों के लिए चारा, ईंधन की लकड़ी और अन्य वन उत्पादों का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। इन संसाधनों पर मानवीय निर्भरता के कारण वन क्षेत्र पर दबाव बढ़ता है, जिससे एगेरेटिना एडेनोफोरा जैसी आक्रामक वनस्पतियों के प्रसार को अनुकूल परिस्थितियां मिल सकती हैं। शोध के लिए इस क्षेत्र का चयन इसलिए किया गया, क्योंकि यहां आक्रामक पौधे से प्रभावित और अप्रभावित दोनों तरह के वन क्षेत्र मौजूद हैं। इससे दोनों क्षेत्रों की वनस्पति संरचना और विविधता की तुलना करना संभव हुआ।

 

चंपावत जिले के बनलेख के मिश्रित वनों में एगेरेटिना एडेनोफोरा (कालाबांसा) के प्रभाव पर शोध किया गया। तेजी से फैल रहा यह आक्रामक खरपतवार जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके प्रसार से वनस्पतियों की विविधता और प्राकृतिक पुनर्जनन क्षमता प्रभावित हो रही है। समय रहते इस पर नियंत्रण की जरूरत है। – डॉ. कविता खत्री, प्राध्यापक, चंपावत परिसर



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