प्रदेश में बालिका शिक्षा को बढ़ाव देने के दावों के बीच कुछ बालिका इंटरमीडिएट काॅलेज प्राइमरी स्कूलों में चल रहे हैं। यह हाल तब है, जबकि शिक्षा विभाग का वार्षिक बजट 12 हजार करोड़ से ज्यादा का है। इसके बाद भी एक विद्यालय को 13 साल तो दूसरे को 20 साल बाद भी अपना भवन नहीं मिल पाया है। कुछ अन्य स्कूलों का भी यही हाल है।
विभाग में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के नाम पर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। विभाग की ओर से एक तरफ 840 से अधिक राजकीय विद्यालयों में हाइब्रिड मोड में स्मार्ट और वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। आधुनिक तकनीक (आईसीटी) के माध्यम से, देहरादून के केंद्रीयकृत स्टूडियो से इन स्कूलों में लाइव पढ़ाई कराई जा रही है।
विभाग का दावा है कि इसका उद्देश्य छात्रों को डिजिटल तकनीक से जोड़कर शिक्षा को सरल और रोचक बनाना है। इसमें छात्र अपनी कक्षा में उपस्थित रहकर विशेष वर्चुअल सत्रों में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा विभाग की ओर से बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना चलाई जा रही है। जिसमें कक्षा नौवीं में पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिल या फिर इसे खरीदने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वहीं, समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी और अशासकीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को मुफ्त किताबें दी जा रही है।