‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर मंथन:समागम में संतों की आवाज बुलंद करने पहुंचे दिग्गज, बताया राष्ट्रहित का मुद्दा – Cm Dhami And Shivraj Singh Chouhan And Ramdev Arrived At One Nation One Election Event Held In Haridwar


केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को हरिद्वार के प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम में एक राष्ट्र-एक चुनाव के विचार का समर्थन किया। संतों के इस समागम में शिवराज सिंह चौहान ने बार-बार होने वाले चुनावों को देश की प्रगति में बाधक बताया। उन्होंने संत समाज से इस सांविधानिक परिवर्तन के लिए जनजागरण का आह्वान किया। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राष्ट्रहित, सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा राष्ट्रीय विषय बताया। दोनों शीर्ष नेताओं ने इस पहल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की पहल बताया।


बता दें कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक राष्ट्र-एक चुनाव के संकल्प को देश के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार के चुनाव विकास की गति और जनसेवा को प्रभावित करते हैं। इससे समय, पैसा और प्रशासनिक ऊर्जा का भारी नुकसान होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार चुनावों से स्कूलों में पढ़ाई रुकती है। प्रशासनिक मशीनरी चुनावी तैयारियों में लग जाती है। जनता तक विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हों तो संसाधनों की बचत होगी। चुनाव संबंधी समय की भी बचत होगी। इससे प्रशासनिक ध्यान विकास पर केंद्रित रह पाएगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने संत समाज से अपील की कि वे अपनी उपस्थिति और प्रभाव से जनजागरण में मदद करें। उन्होंने संतों से अपने प्रवचनों में इस विचार का समर्थन करने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है। उन्होंने जोर दिया कि देश आगे रहेगा तो पार्टियां भी बनी रहेंगी।

वहीं, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव राजनीतिक नहीं है। यह राष्ट्रहित, सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। निरंतर चुनावी प्रक्रिया का प्रभाव शासन और विकास कार्यों पर पड़ता है। बार-बार चुनाव होने से आचार संहिता लागू होती है। इससे बड़ी संख्या में अधिकारियों और सुरक्षा बलों को चुनाव संबंधी दायित्वों में लगाना पड़ता है। धामी ने कहा कि एक साथ चुनाव से सार्वजनिक धन और संसाधनों की बचत होगी। प्रशासन को जनसेवा और विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिलेगा।



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